फुर्सत कहा है
पल भर की
जो संभाल सकू जिंदगी
कुछ मन जैसी
और एक ये भी है
की समय की कोई कमी नहीं
समय तो है
शायद समझ नहीं
जो संभाल न सकू जिंदगी
कुछ मन जैसी
हा चल रहा है सफर
कुछ चाहा कुछ अनचाहा सा
सोचने को हजार बाते
पर काश अड़ जाता है
लेने को फैसले
और सफर हर रोज
वही के वही हो रहा है
कुछ चाहा कुछ अनचाहा सा
**************
शशिकांत शांडिले (एकांत), नागपुर
मो.९९७५९९५४५०
No comments:
Post a Comment