Monday, 26 January 2026

सफर ......................

फुर्सत कहा है 

पल भर की 

जो संभाल सकू जिंदगी 

कुछ मन जैसी 

और एक ये भी है 

की समय की कोई कमी नहीं 


समय तो है 

शायद समझ नहीं 

जो संभाल न सकू जिंदगी 

कुछ मन जैसी 

हा चल रहा है सफर 

कुछ चाहा कुछ अनचाहा सा 


सोचने को हजार बाते 

पर काश अड़ जाता है  

लेने को फैसले 

और सफर हर रोज 

वही के वही हो रहा है 

कुछ चाहा कुछ अनचाहा सा 

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शशिकांत शांडिले (एकांत), नागपुर 

मो.९९७५९९५४५०

Sunday, 24 June 2018

मेरा परिचय...

शशिकांत पुरुषोत्तम शांडीले यांचा अल्प परिचय :

दि.०७ एप्रिल१९८६ रोजी नागपूर (महाराष्ट्र) जिल्ह्यातील टाकळी (भंसाळी) या छोट्याश्या गावातील एका सर्वसाधारण कुटुंबात शशिकांत शांडीले यांचा जन्म झाला. 
शशिकांतचे वडील शिक्षक होते त्यामुळे पुस्तकांशी लहानपणापासुनच जवळचा संबंध. मराठी वाङ्मयातून शशिकांतने पदवी धारण केलेली असून ते एका खाजगी कार्यालयात कार्यरत आहे. 
प्रेमनातीमाणुसकी विषयी संवेदनशीलतेचा भास यांच्या कवितेतून होतो. प्रेमविरहगरीबीदेशप्रेमराजकारण यासारख्या विविध विषयांवर यांनी कविता लिहिलेल्या आहेत. यांचे नावे कोणतेही कवितासंग्रह प्रकाशित नाही परंतु विविध हिंदीमराठी सामुहिक कवितासंग्रहामध्ये आणि अंकांमध्ये यांच्या कविता प्रकाशित आहेत. 
यांना पारस काव्यकलाजनजागृती संस्थासानपाडामुंबई द्वारे राज्यस्तरीय काव्यरत्न पुरस्कार-२०१६ प्राप्त आहे. 

जीवनाचा प्रवास साहित्यसेवेत सुरु आहे.
धन्यवाद !

शशिकांत पुरुषोत्तम शांडीले
भ्र.९९७५९९५450
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शशिकांत पुरुषोत्तम शांडिले इनका अल्प परिचय :

शशिकांत शांडिले का जन्म ०७ अप्रैल१९८६ को नागपुर (महाराष्ट्र) के निकट गाँव टाकली भंसाली स्थित मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ. शशिकांत के पिता पुरुषोत्तम शांडिले शिक्षक थे एवं इनकी माता लक्ष्मीबाई गृहिणी थीशशिकांत के युवावस्था में ही इनके माता-पिता का देहांत हो गया। इनका जीवन साधारणतः संघर्षमय रहा. शशिकांत मराठी वांग्मय से स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुके है तथा वे एक निजी कार्यालय में कार्यरत है.
प्रेमरिश्ते तथा इंसानियत के प्रति संवेदनशीलता इनके द्वारा लिखी कविताओं में महसूस होती हैजीवन के कुछ वर्ष अकेले रहने के कारण उनकी कविताओं में दर्द और निराशा दिखाई पड़ती है. प्रेमविरहगरीबीदेशप्रेमराजकारण जैसे विविध विषयों पर इनके द्वारा कवितायें लिखी गई है. इनका अबतक कोई कवितासंग्रह प्रकाशित नहीं है किंतु मराठी एवं हिंदी भाषिक साझा कवितासंग्रहों एवं मासिकों में इनकी कवितायें प्रकाशित है. 
इनको पारस काव्यकलाजनजागृती संस्थासानपाडामुंबई द्वारा राज्यस्तरीय "काव्यरत्न" पुरस्कार -२०१६ प्राप्त है. 

जिंदगी का सफर साहित्य सेवा में चल रहा है। 
धन्यवाद !

शशिकांत पुरुषोत्तम शांडीले
भ्र.९९७५९९५४५०
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